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वे फेल, मैं पास

सतेंद्र जी ने जानबूझकर वही सवाल किया और मेरे उत्तर देने से पहले बोले कि आप आज भी भूल गये होंगे..
शायद यह चौथी क्लास की बात है। सतेंद्र जी हमें सोशल साइंस पढ़ाते थे और जी.के. भी। वे अमरोहा से आते थे। उनके साथ शायद दो और टीचर, प्रेम और श्रीराम भी आते थे। प्रेम जी का चेहरा भोला लगता था, जबकि श्रीराम जी को देखकर हर कोई मन में ही ‘श्री राम, श्री राम’ करता था। इसी बहाने क्लास के बहुत से नास्तिक बच्चे भगवान का नाम ले लेते।

सतेंद्र जी देखने में शांत लगते थे और व्यवहार में भी वैसे ही थे। उनकी खासियत यह थी कि वे बिना पिटाई के भी हमें याद करवा सकते थे। अब किस्से की ओर बढ़ते हैं।

उस दिन वे क्लास में जी.के. की किताब से सवाल पूछने लगे। हमें खड़े होकर जबाव देना था। जबाव न देने पर खड़ा ही रह जाना था पूरे घंटे। मैं सवाल का उत्तर नहीं दे पाया। सतेंद्र जी ने कहा कि इन्होंने याद किया था, लेकिन बेचारे भूल गए। इसपर सारी क्लास को मुझपर मामूली हंसी आ गयी और मेरी बत्ती गुल।

अगले दिन वही सवाल फिर मुझसे उन्होंने पूछा। नतीजा सिफर। सतेंद्र जी ने कहा कि सरदारजी फिर भूल गए। फिर उन्होंने भरी क्लास के सामने कहा कि बेचारे रोज याद करते हैं, लेकिन क्लास में याद नहीं रह पाता। फिर क्लास के एक-एक बच्चे की निगाह मुझपर थी। वही एक दिन पुरानी स्माइल के साथ, लेकिन इसबार कुछ ने दांत भी चमका दिये थे। मुझे बड़ा बुरा लगा, सच में।

तीसरे दिन, इस बार सतेंद्र जी ने जानबूझकर वही सवाल किया और मेरे उत्तर देने से पहले बोले कि आप आज भी भूल गये होंगे। फिर से क्लास की निगाहें मुझपर टिकी थीं। मुस्कान थी, पर संशय भी था। शायद वे मेरी खिल्ली उड़ाने की योजना बना रहे हों। सतेंद्र जी की बात खत्म होने के बाद मैंने कहा कि आज याद है। क्लास में सन्नाटा छा गया, ठीक वैसा ही जैसा तूफान से पूर्व होता है। लेकिन वहां ऐसा कुछ था नहीं जो कहा जा सके कि तूफान आने वाला है। एक सांस में मैंने उत्तर दिया, बिल्कुल सटीक। सतेंद्र जी ने वही उत्तर दोबारा सुनने को कहा। मैं बिना हिचक सुनता गया।

सतेंद्र जी ने कहा कि आज इन्होंने याद कर लिया और उम्मीद है आगे भी जारी रखेंगे। क्लास की निगाह अब मुझपर नहीं थी क्योंकि वे फेल, मैं पास हो गया था।

-Harminder Singh



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